बढ़ती जनसंख्या और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए आज तक न जाने कितने सारे पेड़ काट दिए गए, पर लगाए कितने गए ये किसी को नहीं पता।आप सोच रहे होंगे स्किन कैंसर से पेड़ों का क्या लेना, दरअसल बता दे की पेड़ हमारे वातावरण का बैलेंस बरकरार रखते हैं, आज पेड़ों की कमी होने के कारण तथा अपनी सुख सुविधा के लिए मशीनों का उपयोग से ही आज सूर्य की किरणे हम मनुष्य के लिए घातक बनती जा रही हैं कहते हैं न जैसे को तैसा ,आज हमारे पर्यावरण में क्लोरोफ्लोरोकार्बन जिसे सीएफसी गैस भी कहते हैं जो की रेफ्रिजरेटर आदि मशीनों से उत्पन्न होने वाला यह गैस पृथ्वी के ऊपर जो ओजोन लेयर है उसको कमजोर करता जा रहा है जिस वजह से सूर्य की घातक किरने जिसे u.v rays कहते हैं वह पृथ्वी पर आसानी से आ पा रही हैं यही वजह है कि सूर्य की किनारे आज स्किन कैंसर जैसे बीमारी का कारण बनती जा रही हैं, जी हां सूर्य की किरणों कि वजह से स्किन कैंसर  हो सकता है।

क्या किसानों  और मजदूरों को भी स्किन कैंसर हो सकता है?



जी हां आजकल उनके अंदर यह समस्या होने की संभावना सबसे अधिक हो गई है और आप जानते हैं कि किसी भी देश पहचान उनके किसान ही होते हैं,
अगर आप चाहते हैं कि u.v rays पृथ्वी तक ना आए तो जितना हो सके पेड़ पौधे लगाए और अपने सुख सुविधा के लिए ऐसी मशीनों का उपयोग ना करें जो क्लोरोफ्लोरोकार्बन हमारे पर्यावरण में फैलती हो, नहीं तो आज का आपका आराम आगे चलकर आपके लिए ही परेशानी बन सकती है।

उम्मीद है आपको यह पोस्ट अच्छा लगा होगा ऐसे ही जानकारी पाने के लिए right way 100 के साथ जुड़े रहे।

धन्यवाद!

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